स्थानीय स्ंस्कृति, भौगोलिक स्थान और आर्थिक स्थिति में अंतर के कारण भारत के भिन्न - भिन्न क्षेत्रों में पाक शैली में अंतर पाया जाता है। मौसम के अनुसार भी इसमें अंतर होता है।
उत्तर भारत
यह पाक शैली संभवत: सबसे लोकप्रिय है तथा पूरी दुनिया में रेस्त्रां में इसका बड़े पैमाने पर इसका प्रयोग होता है। मोटेतौर पर इसकी विशेषता यह है कि मांस और सब्जियों को तंदूर में पकाया जाता है, दाल में क्रीम का प्रयोग किया जाता है तथा दही का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर में गेहूँ पैदा होता है और इसलिए परंपरागत तौर पर इस क्षेत्र के भोजन के साथ कई तरह की रोटियों - नान, तंदूरी रोटी, चपाती या परांठे का सेवन किया जाता है।
उत्तर भारत का सबसे मशहूर भोजन मुगलाई पाक शैली है। मुगलई पाक शैली मुगल सम्राट के शाही रसोई द्वारा विकसित पाक शैली है तथा मोटे तौर पर इसमें प्रयुक्त सामग्री गैर शाकाहारी होती है। इस पाक शैली की विशेषता यह है कि इसमें दही, तली हुई प्याज, गिरी एवं केशर का प्रयोग होता है।
कश्मीरी पाक शैली में प्रयुक्त होने वाली सबसे महत्वपूर्ण सामग्री मांस ( Mutton ) है जिसकी 30 से अधिक किस्में हैं। परंपरागत कश्मीरी पाक शैली कमोवेश कला जैसी है जिसे वजवान कहा जाता है जो मजबूत मध्य एशियाई प्रभावों को दर्शाती है। वजवान अनुभव का मतलब मुख्य रूप से गैर शाकाहारी व्यंजन है, तथा प्रत्येक में जड़ी-बूटियों की खुशबू होती है और इस क्षेत्र के ताजे उत्पाद से बने होते हैं। कश्मीरी पाक शैली की अनोखी विशेषता यह है कि जिन मसालों का प्रयोग किया जाता है उन्हें तलने की बजाय उबाला जाता है जिससे अनोखा एवं भिन्न फ्लेवर एवं खुशबू प्राप्त होती है।
पंजाबी पाक शैली अन्य पाक शैलियों से इस मायने में अलग नहीं है कि अधिकांश पाक शैलियां मध्य एशियाई एवं मुगलई पाक शैलियों से प्रभावित हैं क्योंकि यह मुगल हमलावरों के लिए प्रवेश बिंदु था। पंजाब में ढाबा की एक समृद्ध परंपरा रही है, जो मार्गों के किनारे, विशेष रूप से Highway Eating Joints हैं। मा की दाल, सरसों दा साग और मक्की दी रोटी, मीट करी जैसे कि रोगन जोश और भरे हुए परांठे इस पाक शैली के कुछ लोकप्रिय व्यंजन हैं।
अवधी पाक शैली में पारसी, कश्मीरी, पंजाबी और हैदराबादी पाक शैलियों की समानताएं हैं। अवध के बावर्चियों एवं रकाबदारों ने खाना पकाने की दम शैली को जन्म दिया। दम अर्थात धीमी आंच पर एक बड़े हांडी एवं कुकिंग में खाद्य पदार्थों को बंद करने की कला जो इस क्षेत्र के लोगों के आराम परस्त दृष्टिकोण एवं नजरिए से बहुत अच्छी तरह संबंधित है। अवध पाक शैली की समृद्धि न केवल पाक शैली की विविधता में है अपितु प्रयोग की गई सामग्रियों में भी है जैसे कि मटन, पनीर और समृद्ध मसाले जिसमें इलायची और केशर शामिल हैं।
दक्षिण भारत
दक्षिण भारत में भोजन की विशेषता यह है कि ग्रीडल पर व्यंजन तैयार किए जाते हैं जैसे कि डोसा, पतले ब्राथ जैसे कि दाल जिसे सांबर कहा जाता है और समुद्री भोजन की एक श्रृंखला। यह क्षेत्र करी पत्ती, इमली और नारियल के खूब प्रयोग के लिए भी जाना जाता है।
आंध्र प्रदेश अपनी हैदराबादी पाक शैली के लिए विख्यात है जो मुगलई पाक शैली से काफी प्रभावित है। तत्कालीन निजाम साम्राज्य का समृद्ध एवं आराम परस्त कुलीन वर्ग और साथ ही काफी समय तक उनके शांतिपूर्ण वर्चस्व ने इस पाक शैली के विकास में ज्यादातर योगदान दिया। परंपरागत हैदराबादी व्यंजनों में जो सबसे महत्वपूर्ण हैं उनमें से कुछ बिरयानी, चिकन कोरमा और शीर खुरमा हैं।
कर्नाटक की पाक शैली की किस्में इसके तीन पड़ोसी दक्षिण भारतीय राज्यों के समान हैं तथा यह उत्तर में स्थित महाराष्ट्र एवं गोवा की पाक शैली से भी मिलती - जुलती है। कर्नाटक में खाना पकाने की दो मुख्य शैलियां हैं - ब्राह्मण पाक शैली जो पूरी तरह शाकाहारी है और कुर्ग की पाक शैली जो पोर्क के अपने व्यंजनों के लिए मशहूर है।
तमिलनाडु की चेट्टीनाड पाक शैली विश्व व्यापी अनुयायियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य की सीमाओं से बाहर जाती है। आमतौर पर व्यंजन गर्म एवं ताजे ग्राउंड मसालों से भरपूर होते हैं और एक विशिष्ट मेन्यू चेट्टीनाड के लोगों की कुलीन जीवनशैली को दर्शाता है।
केरल में संस्कृतियों के आपस में समृद्ध मिश्रण ने Mouth Watering Delicacy के साम्राज्य में योगदान दिया। यहां के खानों को एक विशाल Melting Pot जिन्हें मथा जाता है। अप्पम और स्टीव, उली थीयाल और निश्चित रूप से सर्वव्यापी बनाना चिप्स कुछ सबसे मशहूर व्यंजन हैं, तथापि केरल के उत्तरी भाग में या मालावार तट के मुस्लिम मोप्लाह पाक शैली का वर्चस्व है। यहां के अनेक व्यंजनों में अरब प्रभाव अच्छी तरह दिखाई देता है जैसे कि अलीसा जो एक स्वस्थ गेहूँ एवं मांस का दलिया है। मध्य केरल का दक्षिण भाग वह क्षेत्र है जहां सीरियाई ईसाई पाक कला के अवशेष अनेक होममेकर के लिए गर्व का विषय हैं। केरल की पाक शैली में उनका योगदान कई गुना है तथा सबसे उल्लेखनीय होपर, डक रोस्ट, मीन वेविचथू (रेड फिश करी) और इस्थेयू (स्टेव) हैं।
पूर्वी भारत
बंगाली पाक शैली भारतीय उप महाद्वीप से विकसित एकमात्र परंपरागत मल्टी कोर्स पाक शैली है जो फ्रांसीसी पाक शैली की दृष्टि से संरचना में देषज है जहां भोजन एक बार की बजाय टुकड़ों में परोसा जाता है। बंगाली पाक शैली में सरसों के तेल के साथ काली मिर्च पर बहुत अधिक बल दिया जाता है तथा इसमें अधिक मात्रा में मसालों का प्रयोग होता है। यह पाक शैली मछली, सब्जी, मसूर की दाल और चावल पर बल के साथ अपने तीखे फ्लेवर के लिए विख्यात है। ताजे मीठे पानी की मछली इसकी सबसे अनोखी विशेषताओं में से एक है; बंगाली मछली कई तरह से बनाते हैं जैसे कि उबालकर, दम देकर पकाना, या नारियल के दूध या सरसों के बेस पर सब्जियों एवं सॉस के साथ उबालना।
उड़ीसा की पाक शैली का फ्लेवर आमतौर पर तीखा एवं हल्का मसालायुक्त होता है तथा फिश एवं अन्य सीफूड जैसे कि केकड़ा और झींगा बहुत लोकप्रिय हैं।
भारत के पूर्वी राज्यों जैसे कि सिक्किम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, असम, नागालैंड, मणिपुर के भोजन में उनके भौगोलिक लोकेशन के कारण नाटकीय रूप से काफी अंतर है। ये क्षेत्र तिब्बत, चीन तथा पश्चिमी पाक शैली से भी काफी प्रभावित हैं।
पश्चिम भारत
राजस्थानी पाक शैली काफी विविधतापूर्ण है। स्पेक्ट्रम के एक ओर तत्कालीन राजशाही युग में शिकार के प्रेम ने पाक कला के एक रूप का सृजन किया जो कल्पना से परे है। और Spectrum के दूसरी ओर समान रूप से भव्य मारवाड़ या जोधपुर के सभी शाकाहारी भोजन हैं जिनके लोकप्रिय व्यंजन चूरमा लड्डू एवं दाल बाटी हैं।
गुजरात की एक बड़ी आबादी ऐसी है जो मुख्य रूप से धार्मिक कारणों से मुख्य रूप से शाकाहारी है और इसलिए गुजराती पाक शैली पूरी तरह से शाकाहारी है। इस पाक शैली के लोकप्रिय व्यंजन ओंधिया, पात्र, खांडवी और थहेपला हैं। गुजराती भोजन मीठे होते हैं।
मालवानी / कोंकणी पाक शैली महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र, गोवा तथा पश्चिम कर्नाटक के उत्तरी भाग के हिंदुओं की मानक पाक शैली है। हालांकि मालवानी पाक शैली अधिकतर गैर शाकाहारी होती है, इसमें मुख्य रूप से शाकाहारी डेलीकेसी शामिल होती हैं। मालवानी पाक शैली में नारियल का भरपूर उपयोग होता है तथा यह आमतौर पर बहुत मसालेदार होती है; तथापि, इस क्षेत्र की 'कोंकणास्था ब्राह्मण' खाद्य शैली बहुत बेस्वाद एवं शाकाहारी भी है।
आभार: भारतीय खाद्य इतिहास
उत्तर भारत
यह पाक शैली संभवत: सबसे लोकप्रिय है तथा पूरी दुनिया में रेस्त्रां में इसका बड़े पैमाने पर इसका प्रयोग होता है। मोटेतौर पर इसकी विशेषता यह है कि मांस और सब्जियों को तंदूर में पकाया जाता है, दाल में क्रीम का प्रयोग किया जाता है तथा दही का प्रयोग किया जाता है।
उत्तर में गेहूँ पैदा होता है और इसलिए परंपरागत तौर पर इस क्षेत्र के भोजन के साथ कई तरह की रोटियों - नान, तंदूरी रोटी, चपाती या परांठे का सेवन किया जाता है।
उत्तर भारत का सबसे मशहूर भोजन मुगलाई पाक शैली है। मुगलई पाक शैली मुगल सम्राट के शाही रसोई द्वारा विकसित पाक शैली है तथा मोटे तौर पर इसमें प्रयुक्त सामग्री गैर शाकाहारी होती है। इस पाक शैली की विशेषता यह है कि इसमें दही, तली हुई प्याज, गिरी एवं केशर का प्रयोग होता है।
कश्मीरी पाक शैली में प्रयुक्त होने वाली सबसे महत्वपूर्ण सामग्री मांस ( Mutton ) है जिसकी 30 से अधिक किस्में हैं। परंपरागत कश्मीरी पाक शैली कमोवेश कला जैसी है जिसे वजवान कहा जाता है जो मजबूत मध्य एशियाई प्रभावों को दर्शाती है। वजवान अनुभव का मतलब मुख्य रूप से गैर शाकाहारी व्यंजन है, तथा प्रत्येक में जड़ी-बूटियों की खुशबू होती है और इस क्षेत्र के ताजे उत्पाद से बने होते हैं। कश्मीरी पाक शैली की अनोखी विशेषता यह है कि जिन मसालों का प्रयोग किया जाता है उन्हें तलने की बजाय उबाला जाता है जिससे अनोखा एवं भिन्न फ्लेवर एवं खुशबू प्राप्त होती है।
पंजाबी पाक शैली अन्य पाक शैलियों से इस मायने में अलग नहीं है कि अधिकांश पाक शैलियां मध्य एशियाई एवं मुगलई पाक शैलियों से प्रभावित हैं क्योंकि यह मुगल हमलावरों के लिए प्रवेश बिंदु था। पंजाब में ढाबा की एक समृद्ध परंपरा रही है, जो मार्गों के किनारे, विशेष रूप से Highway Eating Joints हैं। मा की दाल, सरसों दा साग और मक्की दी रोटी, मीट करी जैसे कि रोगन जोश और भरे हुए परांठे इस पाक शैली के कुछ लोकप्रिय व्यंजन हैं।
अवधी पाक शैली में पारसी, कश्मीरी, पंजाबी और हैदराबादी पाक शैलियों की समानताएं हैं। अवध के बावर्चियों एवं रकाबदारों ने खाना पकाने की दम शैली को जन्म दिया। दम अर्थात धीमी आंच पर एक बड़े हांडी एवं कुकिंग में खाद्य पदार्थों को बंद करने की कला जो इस क्षेत्र के लोगों के आराम परस्त दृष्टिकोण एवं नजरिए से बहुत अच्छी तरह संबंधित है। अवध पाक शैली की समृद्धि न केवल पाक शैली की विविधता में है अपितु प्रयोग की गई सामग्रियों में भी है जैसे कि मटन, पनीर और समृद्ध मसाले जिसमें इलायची और केशर शामिल हैं।
दक्षिण भारत
दक्षिण भारत में भोजन की विशेषता यह है कि ग्रीडल पर व्यंजन तैयार किए जाते हैं जैसे कि डोसा, पतले ब्राथ जैसे कि दाल जिसे सांबर कहा जाता है और समुद्री भोजन की एक श्रृंखला। यह क्षेत्र करी पत्ती, इमली और नारियल के खूब प्रयोग के लिए भी जाना जाता है।
आंध्र प्रदेश अपनी हैदराबादी पाक शैली के लिए विख्यात है जो मुगलई पाक शैली से काफी प्रभावित है। तत्कालीन निजाम साम्राज्य का समृद्ध एवं आराम परस्त कुलीन वर्ग और साथ ही काफी समय तक उनके शांतिपूर्ण वर्चस्व ने इस पाक शैली के विकास में ज्यादातर योगदान दिया। परंपरागत हैदराबादी व्यंजनों में जो सबसे महत्वपूर्ण हैं उनमें से कुछ बिरयानी, चिकन कोरमा और शीर खुरमा हैं।
कर्नाटक की पाक शैली की किस्में इसके तीन पड़ोसी दक्षिण भारतीय राज्यों के समान हैं तथा यह उत्तर में स्थित महाराष्ट्र एवं गोवा की पाक शैली से भी मिलती - जुलती है। कर्नाटक में खाना पकाने की दो मुख्य शैलियां हैं - ब्राह्मण पाक शैली जो पूरी तरह शाकाहारी है और कुर्ग की पाक शैली जो पोर्क के अपने व्यंजनों के लिए मशहूर है।
तमिलनाडु की चेट्टीनाड पाक शैली विश्व व्यापी अनुयायियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य की सीमाओं से बाहर जाती है। आमतौर पर व्यंजन गर्म एवं ताजे ग्राउंड मसालों से भरपूर होते हैं और एक विशिष्ट मेन्यू चेट्टीनाड के लोगों की कुलीन जीवनशैली को दर्शाता है।
केरल में संस्कृतियों के आपस में समृद्ध मिश्रण ने Mouth Watering Delicacy के साम्राज्य में योगदान दिया। यहां के खानों को एक विशाल Melting Pot जिन्हें मथा जाता है। अप्पम और स्टीव, उली थीयाल और निश्चित रूप से सर्वव्यापी बनाना चिप्स कुछ सबसे मशहूर व्यंजन हैं, तथापि केरल के उत्तरी भाग में या मालावार तट के मुस्लिम मोप्लाह पाक शैली का वर्चस्व है। यहां के अनेक व्यंजनों में अरब प्रभाव अच्छी तरह दिखाई देता है जैसे कि अलीसा जो एक स्वस्थ गेहूँ एवं मांस का दलिया है। मध्य केरल का दक्षिण भाग वह क्षेत्र है जहां सीरियाई ईसाई पाक कला के अवशेष अनेक होममेकर के लिए गर्व का विषय हैं। केरल की पाक शैली में उनका योगदान कई गुना है तथा सबसे उल्लेखनीय होपर, डक रोस्ट, मीन वेविचथू (रेड फिश करी) और इस्थेयू (स्टेव) हैं।
पूर्वी भारत
बंगाली पाक शैली भारतीय उप महाद्वीप से विकसित एकमात्र परंपरागत मल्टी कोर्स पाक शैली है जो फ्रांसीसी पाक शैली की दृष्टि से संरचना में देषज है जहां भोजन एक बार की बजाय टुकड़ों में परोसा जाता है। बंगाली पाक शैली में सरसों के तेल के साथ काली मिर्च पर बहुत अधिक बल दिया जाता है तथा इसमें अधिक मात्रा में मसालों का प्रयोग होता है। यह पाक शैली मछली, सब्जी, मसूर की दाल और चावल पर बल के साथ अपने तीखे फ्लेवर के लिए विख्यात है। ताजे मीठे पानी की मछली इसकी सबसे अनोखी विशेषताओं में से एक है; बंगाली मछली कई तरह से बनाते हैं जैसे कि उबालकर, दम देकर पकाना, या नारियल के दूध या सरसों के बेस पर सब्जियों एवं सॉस के साथ उबालना।
उड़ीसा की पाक शैली का फ्लेवर आमतौर पर तीखा एवं हल्का मसालायुक्त होता है तथा फिश एवं अन्य सीफूड जैसे कि केकड़ा और झींगा बहुत लोकप्रिय हैं।
भारत के पूर्वी राज्यों जैसे कि सिक्किम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, असम, नागालैंड, मणिपुर के भोजन में उनके भौगोलिक लोकेशन के कारण नाटकीय रूप से काफी अंतर है। ये क्षेत्र तिब्बत, चीन तथा पश्चिमी पाक शैली से भी काफी प्रभावित हैं।
पश्चिम भारत
राजस्थानी पाक शैली काफी विविधतापूर्ण है। स्पेक्ट्रम के एक ओर तत्कालीन राजशाही युग में शिकार के प्रेम ने पाक कला के एक रूप का सृजन किया जो कल्पना से परे है। और Spectrum के दूसरी ओर समान रूप से भव्य मारवाड़ या जोधपुर के सभी शाकाहारी भोजन हैं जिनके लोकप्रिय व्यंजन चूरमा लड्डू एवं दाल बाटी हैं।
गुजरात की एक बड़ी आबादी ऐसी है जो मुख्य रूप से धार्मिक कारणों से मुख्य रूप से शाकाहारी है और इसलिए गुजराती पाक शैली पूरी तरह से शाकाहारी है। इस पाक शैली के लोकप्रिय व्यंजन ओंधिया, पात्र, खांडवी और थहेपला हैं। गुजराती भोजन मीठे होते हैं।
पारसी भोजन भारत के पारसी समुदाय - प्राचीन पारसियों का हालमार्क है। पारसियों का मुख्य व्यंजन धनसख (तली हुई प्याज तथा ब्राउन राइस जिसे दाल, सब्जियों एवं मांस के साथ परोसा जाता है) है जो रविवार को तथा सभी शादी व्याह में एवं त्यौहारों पर खाया जाता है। गोवा की पाक शैली पर पुर्तगाल का मजबूत प्रभाव है क्योंकि पहले यह पुर्तगालियों का उपनिवेश हुआ करता था। ग्रेवी चिली हॉट होती है, मसाले वेनिगर और नारियल से युक्त होते हैं। इस पाक शैली के कुछ उदाहरण बालकायो, जकाती, विंदालूस, सोरपोटेल एवं मोएलोस हैं।
मालवानी / कोंकणी पाक शैली महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र, गोवा तथा पश्चिम कर्नाटक के उत्तरी भाग के हिंदुओं की मानक पाक शैली है। हालांकि मालवानी पाक शैली अधिकतर गैर शाकाहारी होती है, इसमें मुख्य रूप से शाकाहारी डेलीकेसी शामिल होती हैं। मालवानी पाक शैली में नारियल का भरपूर उपयोग होता है तथा यह आमतौर पर बहुत मसालेदार होती है; तथापि, इस क्षेत्र की 'कोंकणास्था ब्राह्मण' खाद्य शैली बहुत बेस्वाद एवं शाकाहारी भी है।
आभार: भारतीय खाद्य इतिहास





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